Makar Sankranti के पावन पर्व का महत्त्व जानीए – पंडीत मिश्रा
पंडित प्रदीप मिश्रा जी ने मकर संक्रांति के पावन पर्व के आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व बताया है..यह पुरी जानकारी हम ईह पोष्ट मे आपको देंगे ! उन्होंने बताया कि पूरे वर्ष में यह एक विशेष दिन होता है जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण की शुरुआत होती है। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व है, जिसे पूजन, गंगा स्नान और दान-पुण्य के कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है !
पंडित जी के अनुसार, स्कंद पुराण में यह उल्लेख मिलता है कि मकर संक्रांति ही वह दिन है जब भगवान शिव और भगवान नारायण एक साथ गंगा स्नान के लिए प्रकट हुए थे ओर इसी कारण से इस दिन गुड़ और तिल के लड्डू बनाने और दान करने की परंपरा चली आ रही है। यह तिथि महादेव और श्री हरि विष्णु के मिलन का प्रतीक है, जो भक्तों के लिए असीम कल्याणकारी मानी जाती है।
पंडी जी नै एक विशेष उपाय की चर्चा की गई है, जिसे ‘गुप्त लक्ष्मी दान’ कहा जाता है। मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन यदि तिल और गुड़ के लड्डू के भीतर सिक्का (लक्ष्मी) रखकर उसे किसी मंदिर में गुप्त रूप से दान किया जाए, तो उस परिवार पर महालक्ष्मी की विशेष कृपा बनी रहती है। माता लक्ष्मी ने भी इसी दिन भगवान शिव और नारायण के दर्शन किए थे, इसलिए इस दान का फल और भी बढ़ जाता है।
पंडीत जी ने अंत में, इस दान के स्वास्थ्य लाभों के बारे में बताते हुए पंडित जी कहते हैं कि जो व्यक्ति मकर संक्रांति पर इस प्रकार का दान करता है, उसके घर में कैंसर, किडनी या लीवर जैसी गंभीर बीमारियां प्रवेश नहीं करतीं। यह सरल सा उपाय न केवल आर्थिक समृद्धि लाता है बल्कि परिवार के सदस्यों को शारीरिक कष्टों से भी मुक्ति दिलाने में सहायक होता है।