सूखे का संकट और अल-नीनो का खतरा..1972 जैसा सुखा
मौसम विशेषज्ञ किरण वाघमोड़े ने बताया है की साल 2026 के मानसून पर अलनीनो का साया मंडरा रहा है। वाघमोडे के अंदाज के अनुसार वर्तमान में सक्रिय ला नीना धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है और ऐसी संभावना जताई जा रही है कि जून-जुलाई 2026 तक अल नीनो पूरी तरह विकसित हो सकता है। ऐतिहासिक आंकड़ों को देखें तो जब भी अल नीनो सक्रिय होता है, मानसून के कमजोर रहने की 84% संभावना होती है। 1972 जैसे भीषण सूखे की तुलना में आज हमारी सिंचाई व्यवस्था और अन्न भंडार काफी बेहतर हैं, फिर भी यह किसानों के लिए चिंता का विषय हो सकता है ऐसा अनुमान किरण वाघमोडे ने लगाया है !
किरण वाघमोड़े बताते हैं कि बहुत सारे वैश्विक मॉडल्स, जैसे कि ऑस्ट्रेलिया का मौसम विभाग और अमेरिका का क्लाइमेट प्रेडिक्शन सेंटर, संकेत दे रहे हैं कि जुलाई से सितंबर के बीच अल नीनो आने की संभावना 50% से 61% तक बढ़ गई है ईससे अलनिनो का खतरा साफ दिख रहा है !
वाघमोडे ने बताया की समुद्र की सतह के नीचे का तापमान बढ़ रहा है और गर्म पानी पूर्व की ओर बढ़ रहा है, जो अल नीनो के आगमन के स्पष्ट संकेत दे रहा हैं।
एलनिनो के कारण मानसून के दौरान बारिश में लंबे समय तक का ‘ब्रेक’ या बड़ा अंतराल देखने को मिल सकता है, जिससे फसलों पर बुरा असर पड़ने की आशंका है किरन वाघमोडे ने जताई है !
देश के सभी हिस्सों के लिए यह पूर्वानुमान के चलते सतर्क रहने की चेतावनी दी गयी है। इस साल बारिश की मात्रा औसत से कम रह सकती है कुछ क्षेत्रों में अचानक भारी बारिश हो सकती है, लेकिन कुल मिलाकर मानसून का वितरण असमान रहने की संभावना है। सकारात्मक आईओडी की अनुपस्थिति भी इस स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना सकती है, क्योंकि यह मानसून को सहारा देने के लिए फिलहाल न्यूट्रल बना हुआ है इसीलीए देश मे ईस साल कम बारीश होनेवाली है!
किरण वाघमोडे के अंदाज के अनुसार मौसम में हो रहे इन बदलावों और आने वाले समय में ओलावृष्टि की संभावनाओं पर नजर रखना जरूरी है। खेती की योजना बनाने के लिए मौसम के इन अपडेट्स को गंभीरता से लेना चाहिए ताकि संभावित नुकसान से बचा जा सके।