इस वर्ष मकर संक्रांति का पर्व आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास होने वाला है। पूरे 22 वर्षों के बाद ऐसा शुभ संयोग बन रहा है जब मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी एक ही दिन पड़ रही हैं। इससे पहले यह दुर्लभ मेल साल 2003 में देखा गया था। ज्योतिष गणना के अनुसार, इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का भी निर्माण हो रहा है, जो दान-पुण्य और पूजा-पाठ के फल को कई गुना बढ़ा देता है। 14 जनवरी की दोपहर 3:07 बजे सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करेंगे, जिससे महापुण्य काल की शुरुआत होगी।
मकर संक्रांति के साथ ही सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं, जिसे देवताओं का दिन और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, सूर्य का उत्तरायण होना अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का संकेत है, क्योंकि इस दिन से रातें छोटी और दिन बड़े होने लगते हैं। इस अवसर पर गंगा स्नान का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस पावन तिथि पर सभी देवी-देवता रूप बदलकर संगम में स्नान के लिए आते हैं। प्रयागराज में लगने वाले प्रसिद्ध माघ मेले का पहला आधिकारिक स्नान भी इसी दिन से शुरू होता है।




















